ଓ୍ଵାଚଟାଓ୍ଵର ଅନଲାଇନ୍ ଲାଇବ୍ରେରୀ
ଓ୍ଵାଚଟାଓ୍ଵର
ଅନଲାଇନ୍ ଲାଇବ୍ରେରୀ
ଓଡ଼ିଆ
  • ବାଇବଲ
  • ପ୍ରକାଶନ
  • ସଭା
  • mwbr21 ଜୁଲାଇ ପୃଷ୍ଠା ୧-୧୧
  • ଜୀବନ ଓ ସେବା ସଭା ପୁସ୍ତିକା ପାଇଁ ରେଫରେନ୍‌ସ

ଏ ସମ୍ୱନ୍ଧରେ କୌଣସି ଭିଡିଓ ଉପଲବ୍ଧ ନାହିଁ ।

ଭିଡିଓ ଲୋଡିଙ୍ଗ୍ ହେବାରେ କିଛି ତ୍ରୁଟି ରହିଛି । ଆମେ ଦୁଃଖିତ ।

  • ଜୀବନ ଓ ସେବା ସଭା ପୁସ୍ତିକା ପାଇଁ ରେଫରେନ୍‌ସ
  • ଜୀବନ ଓ ସେବା ପାଇଁ ରେଫରେନ୍‌ସ—ସଭା ପୁସ୍ତିକା (୨୦୨୧)
  • ଉପଶୀର୍ଷକ
  • ୫-୧୧ ଜୁଲାଇ
  • ୧୨-୧୮ ଜୁଲାଇ
  • ୧୯-୨୫ ଜୁଲାଇ
  • ୨୬ ଜୁଲାଇ–୧ ଅଗଷ୍ଟ
  • ୨-୮ ଅଗଷ୍ଟ
  • ୯ -୧୫ ଅଗଷ୍ଟ
  • ୧୬-୨୨ ଅଗଷ୍ଟ
  • ୨୩-୨୯ ଅଗଷ୍ଟ
  • ୩୦ ଅଗଷ୍ଟ–୫ ସେପ୍ଟେମ୍ବର
ଜୀବନ ଓ ସେବା ପାଇଁ ରେଫରେନ୍‌ସ—ସଭା ପୁସ୍ତିକା (୨୦୨୧)
mwbr21 ଜୁଲାଇ ପୃଷ୍ଠା ୧-୧୧

ଜୀବନ ଓ ସେବା ସଭା ପୁସ୍ତିକା ପାଇଁ ରେଫରେନ୍‌ସ

୫-୧୧ ଜୁଲାଇ

ବାଇବଲର ବହୁମୂଲ୍ୟ ଧନ ପାଆନ୍ତୁ | ଦ୍ୱିତୀୟ ବିବରଣ ୧୧-୧୨

“यहोवा किस तरह की उपासना चाहता है?”

इंसाइट-2 पेज 1007, पैरा 4

जान

पूरी जान से सेवा कीजिए। जान का मतलब पूरा इंसान होता है। फिर भी कुछ आयतों में कहा गया है कि हम न सिर्फ “पूरी जान से” बल्कि “पूरे दिल से” यहोवा की सेवा करें। (व्य 4:29; 11:13, 18) जब जान का मतलब पूरा इंसान है, तो फिर अलग से क्यों कहा गया है कि हम दिल से भी सेवा करें? जवाब के लिए एक मिसाल पर गौर कीजिए: अगर एक इंसान किसी की गुलामी करने के लिए खुद को बेच देता है, तो दूसरा आदमी उसका मालिक बन जाता है। फिर भी हो सकता है कि वह गुलाम पूरे दिल से अपने मालिक की सेवा न करे। (इफ 6:5 से तुलना करें; कुल 3:22) “तन-मन” से परमेश्‍वर की सेवा करने का मतलब है खुद को पूरी तरह उसकी सेवा में लगा देना। अपनी ताकत, काबिलीयत और हर चीज़ लगा देना।—मत 5:28-30 से तुलना करें; लूक 21:34-36; इफ 6:6-9; फिल 3:19; कुल 3:23, 24.

इंसाइट-1 पेज 84, पैरा 3

वेदी

यहोवा ने इसराएलियों को आज्ञा दी कि वे झूठे धर्म की सभी वेदियाँ तोड़ दें और वेदियों के पास जो पूजा-लाठें और पूजा-स्तंभ होते थे, उन्हें भी नष्ट कर दें। (निर्ग 34:13; व्य 7:5, 6; 12:1-3) इसराएलियों को कनानियों के जैसी वेदियाँ नहीं बनानी थीं और उनकी तरह वेदियों पर बच्चों की बलि नहीं चढ़ानी थी। (व्य 12:30, 31; 16:21) उनसे यह भी कहा गया कि वे बहुत सारी वेदियाँ न बनाएँ। उन्हें एकमात्र सच्चे परमेश्‍वर यहोवा के लिए एक ही वेदी बनानी थी और वह भी उस जगह जो यहोवा बताता। (व्य 12:2-6, 13, 14, 27; बैबिलोन में एक देवी इशतर के लिए 180 वेदियाँ बनायी गयी थीं।)

ବହୁମୂଲ୍ୟ ରତ୍ନ

ଇନସାଇଟ୍‌-୧ ପୃ ୯୨୫-୯୨୬

ଗରିଷୀମ୍‌ ପର୍ବତ

ମୋଶା ଯେପରି ଇସ୍ରାଏଲୀୟମାନଙ୍କୁ କହିଥିଲେ, ସେମାନେ କିଣାନ ଦେଶ ପହଞ୍ଚିବାର କିଛି ସମୟ ପରେ ସେମାନଙ୍କ ସବୁ ଗୋଷ୍ଠୀ ଗରିଷୀମ୍‌ ଓ ଏବଲ ପର୍ବତ ପାଖରେ ଏକାଠି ହେଲେ । ସେଇଠି ସେମାନଙ୍କୁ ପଢ଼ି ଶୁଣାଇ ଦିଆଗଲା ଯେ ଯଦି ସେମାନେ ଯିହୋବାଙ୍କ ଆଜ୍ଞାଗୁଡ଼ିକୁ ମାନିବେ, ତେବେ ସେମାନଙ୍କୁ କେଉଁ ଆଶିଷଗୁଡ଼ିକ ମିଳିବ ଏବଂ ଯଦି ନ ମାନିବେ, ତେବେ ସେମାନଙ୍କୁ କʼଣ ଅଭିଷାପଗୁଡ଼ିକ ମିଳିବ । ଗରିଷୀମ୍‌ ପର୍ବତ ସାମନାରେ ଶିମୀୟୋନ, ଲେବୀ, ଯିହୁଦା, ଇଷାଖର, ଯୋଷେଫ ଓ ବିନ୍ୟାମୀନ ଗୋଷ୍ଠୀ ଏକାଠି ହେଲେ । ଲେବୀୟମାନେ ନିୟମ-ସିନ୍ଦୁକ ନେଇ ଘାଟି ପାଖରେ ଠିଆ ହୋଇଥିଲେ । ଅନ୍ୟ ଛଅଟି ଗୋଷ୍ଠୀ ଏବଲ ପର୍ବତ ସାମନାରେ ଏକାଠି ହୋଇଥିଲେ ।—ଦ୍ୱିବି ୧୧:୨୯, ୩୦; ୨୭:୧୧-୧୩; ଯିହୋ ୮:୨୮-୩୫.

୧୨-୧୮ ଜୁଲାଇ

ବାଇବଲର ବହୁମୂଲ୍ୟ ଧନ ପାଆନ୍ତୁ | ଦ୍ୱିତୀୟ ବିବରଣ ୧୩-୧୫

“यहोवा ने गरीबों की मदद करने के लिए कानून दिए”

इंसाइट-2 पेज 1110 पै 3

दसवाँ हिस्सा

लेवियों को जो दसवाँ हिस्सा दिया जाता था, इसके अलावा हर साल शायद एक और बार उपज का दसवाँ हिस्सा अलग रखा जाता था। जब इसराएली परिवार सालाना त्योहारों के लिए यरूशलेम जाते थे, तो ज़्यादातर वे ही उपज के इस दसवें हिस्से को खाते-पीते थे। जो परिवार यरूशलेम से काफी दूर रहते थे, उनके लिए जानवरों या अनाज का दसवाँ हिस्सा लेकर उतनी दूर जाना मुश्‍किल होता। इसलिए वे उसे बेच देते और मिलनेवाला पैसा त्योहारों के वक्‍त खर्च करते थे। (व्य 12:4-7, 11, 17, 18; 14:22-27) लेकिन हर तीसरे और छठे साल के आखिर में इसराएली परिवार इस दसवें हिस्से को त्योहारों के समय खा-पी नहीं सकते थे। उन्हें यह हिस्सा लेवियों, परदेसियों, अनाथों और विधवाओं को दे देना था।—व्य 14:28, 29; 26:12.

इंसाइट-2 पेज 833

सब्त का साल

सब्त के साल लोगों का कर्ज़ माफ कर दिया जाता था। जब इसराएली दूसरों का कर्ज़ माफ कर देते, तो इससे यहोवा की महिमा होती थी। कुछ लोगों का कहना है कि कर्ज़ असल में माफ नहीं होता था। सब्त के साल बस एक इसराएली को किसी और इसराएली से ज़बरदस्ती नहीं करनी थी कि वह कर्ज़ चुकाए, क्योंकि सब्त के साल किसान को कोई उपज नहीं मिलती थी। मगर वह एक परदेसी से कर्ज़ चुकाने की माँग कर सकता था। (व्य 15:1-3) कुछ रब्बियों का मानना है कि गरीबों को जो कर्ज़ दिया जाता था उसे दान समझकर माफ कर दिया जाता था, लेकिन व्यापार के लिए दिया गया कर्ज़ माफ नहीं होता था।

इंसाइट-2 पेज 978 पै 6

दास

मालिक और दास के आपसी व्यवहार के बारे में कानून। एक इसराएली को अपने इसराएली दास के साथ वैसा व्यवहार नहीं करना था जैसे वह एक परदेसी के साथ करता। जो परदेसी एक इसराएली का दास होता, वह उस इसराएली की जायदाद बन जाता था। वह उस दास को विरासत में अपने बेटे को दे सकता था। (लैव 25:44-46) लेकिन जहाँ तक इसराएली दास की बात है, उसे गुलामी के सातवें साल या छुटकारे के साल रिहा कर देना था। इनमें से जो भी साल पहले आता, उस साल उसे इसराएली दास को रिहा कर देना था। इसराएली के साथ उसे दास जैसा नहीं बल्कि दिहाड़ी के मज़दूर जैसा व्यवहार करना था। (निर्ग 21:2; लैव 25:10; व्य 15:12) जब वह इसराएली दास को रिहा करता, तो उसे कुछ देना होता था ताकि वह आज़ाद होने के बाद अपनी एक अलग ज़िंदगी शुरू कर सके।—व्य 15:13-15.

ढूँढ़ें अनमोल रत्न

प्र06 4/1 पेज 31

पाठकों के प्रश्‍न

निर्गमन 23:19 में बतायी इस पाबंदी से हम क्या सीख सकते हैं: “बकरी का बच्चा उसकी माता के दूध में न पकाना”?

मूसा की कानून-व्यवस्था में दिए इस नियम का, बाइबल में तीन बार ज़िक्र आता है। यह नियम हमें सिखाता है कि यहोवा की नज़र में क्या उचित है और उसमें कैसी करुणा और कोमल भावनाएँ हैं। साथ ही, यह नियम इस बात पर ज़ोर देता है कि यहोवा को झूठी उपासना से सख्त नफरत है।—निर्गमन 34:26; व्यवस्थाविवरण 14:21.

बकरी या किसी और जानवर के बच्चे को उसी की माँ के दूध में पकाना, यहोवा के ठहराए इंतज़ाम के खिलाफ होता। परमेश्‍वर ने यह इंतज़ाम ठहराया है कि मादा जानवर के दूध से उसके बच्चों का पोषण हो और वे बढ़ सकें। इसलिए जैसा एक विद्वान कहता है, बकरी के बच्चे को उसी की माँ के दूध में पकाना, “माँ-बच्चे के बीच परमेश्‍वर के ठहराए पवित्र बंधन की तौहीन करना है।”

कहा जाता है कि बकरी के बच्चे को उसकी माँ के दूध में पकाना, झूठे धर्म के लोगों का एक आम रिवाज़ था। वे मानते थे कि ऐसा करने से पानी बरसेगा। अगर यह वाकई झूठे धर्म का रिवाज़ था, तो इस्राएली इस पाबंदी की वजह से आस-पास की जातियों के उस रिवाज़ से दूर रह सके जो बेमतलब का और क्रूरता से भरा था। मूसा की कानून-व्यवस्था में उन्हें साफ बताया गया था कि वे दूसरी जातियों की रीत पर न चलें।—लैव्यव्यवस्था 20:23.

आखिरी सीख यह है कि इस पाबंदी से हमें यहोवा की कोमल करुणा देखने को मिलती है। दरअसल, व्यवस्था में ऐसे बहुत-से नियम दिए गए थे जिनमें इस्राएलियों से कहा गया था कि वे जानवरों पर क्रूरता न करें और कुदरत के नियम के खिलाफ कोई भी काम न करें। मिसाल के लिए, किसी भी जानवर के बच्चे की बलि तब तक नहीं चढ़ायी जा सकती थी, जब तक कि वह अपनी माँ के साथ कम-से-कम सात दिन तक न रहा हो, जानवर और उसके बच्चे को एक ही दिन बलि नहीं चढ़ाया जाना था और किसी घोंसले से चिड़िया के साथ-साथ उसके अंडों या बच्चों को लेना मना था।—लैव्यव्यवस्था 22:27, 28; व्यवस्थाविवरण 22:6, 7.

इन सारी बातों से साफ है कि मूसा की कानून-व्यवस्था, सिर्फ जटिल नियमों और पाबंदियों की लंबी-चौड़ी लिस्ट नहीं है। इसके बजाय यह हमें कई ज़रूरी सबक सिखाती है। इसके पीछे छिपे सिद्धांत हमें उन ऊँचे नैतिक आदर्शों की और भी साफ समझ देते हैं, जिनसे यहोवा के शानदार गुणों की सही झलक मिलती है।—भजन 19:7-11.

୧୯-୨୫ ଜୁଲାଇ

ବାଇବଲର ବହୁମୂଲ୍ୟ ଧନ ପାଆନ୍ତୁ | ଦ୍ୱିତୀୟ ବିବରଣ ୧୬-୧୮

“सही फैसला करने के लिए सिद्धांत”

इंसाइट-1 पेज 343 पै 5

अंधापन

जो न्यायी बेईमान होने की वजह से किसी के साथ अन्याय करता, उसे बाइबल में अंधा बताया गया है। कानून में न्यायियों से कहा गया कि वे रिश्‍वत या तोहफे न लें और पक्षपात न करें, क्योंकि ये उसे अंधा कर देंगी और वह सही फैसला नहीं कर पाएगा। “रिश्‍वत एक बुद्धिमान इंसान को भी अंधा कर सकती है।” (व्य 16:19) और यहाँ तक कि एक ऐसा न्यायी जो ईमानदार और काबिल है, अगर घूस ले तो उसकी नीयत बिगड़ सकती है। वह जानबूझकर या फिर न चाहते हुए भी गलत फैसला सुना सकता है।—लैव 19:15.

इंसाइट-2 पेज 511 पै 7

संख्या

दो। बाइबल में ज़्यादातर कानूनी मामलों के सिलसिले में संख्या दो का ज़िक्र आता है। किसी मुकद्दमे के लिए अगर दो लोग गवाही दें, तो यकीन किया जाता था न कि एक की गवाही पर। जब न्यायियों के सामने कोई मुकद्दमा होता, तो दो या तीन गवाहों का होना ज़रूरी था। मसीही मंडली में भी किसी मामले का फैसला करते समय एक से ज़्यादा गवाहों का होना ज़रूरी होता है।—व्य 17:6; 19:15; मत 18:16; 2कुर 13:1; 1ती 5:19; इब्र 10:28.

इंसाइट-2 पेज 685 पै 6

याजक

अगर एक मुकद्दमा निपटाना बहुत मुश्‍किल लगता और न्यायी उसका फैसला नहीं कर पाते, तो वे याजकों के पास जा सकते थे। याजक उन्हें मामले को निपटाने में मदद करते थे।—व्य 17:8, 9.

ବହୁମୂଲ୍ୟ ରତ୍ନ

ଇନସାଇଟ୍‌-୧ ପୃ ୭୮୭

ଇସ୍ରାଏଲୀୟମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରୁ ବାହାର କରିଦେବାର ବ୍ୟବସ୍ଥା

ଈଶ୍ୱର ନିୟମ ଦେଇଥିଲେ ଯେ ଯେଉଁ ଲୋକମାନେ କୌଣସି ମକଦ୍ଦମାରେ ସାକ୍ଷ୍ୟ ଦେଉଥିଲେ, ସେମାନେ ହିଁ ପ୍ରଥମେ ଦୋଷୀକୁ ପଥର ମାରୁଥିଲେ । (ଦ୍ୱିବି ୧୭:୭) ଏପରି କରି ସେମାନେ ଦେଖାଉଥିଲେ ଯେ ତାହାଙ୍କ ଆଜ୍ଞାକୁ ସେମାନେ ହୃଦୟର ସହ ମାନିବାକୁ ଚାହାନ୍ତି । ତାʼ ଛଡ଼ା, ସେମାନେ ଏହା ମଧ୍ୟ ଚାହାନ୍ତି ଯେ ମଣ୍ଡଳୀର ପ୍ରତ୍ୟେକ ବ୍ୟକ୍ତି ଯେକୌଣସି ପରିସ୍ଥିତିରେ ନିୟମକୁ ମାନନ୍ତୁ ଏବଂ ମଣ୍ଡଳୀ ଶୁଦ୍ଧ ରହୁ । ଈଶ୍ୱର ଏହି ନିୟମ ଏଥିପାଇଁ ମଧ୍ୟ ଦେଇଥିଲେ ଯେ କୌଣସି ବ୍ୟକ୍ତି ବିନା ବୁଝିବିଚାରି ସାକ୍ଷ୍ୟ ନ ଦିଅନ୍ତୁ କିମ୍ବା ଜାଣିଶୁଣି ମିଥ୍ୟା ସାକ୍ଷ୍ୟ ନ ଦିଅନ୍ତୁ ।

୨୬ ଜୁଲାଇ–୧ ଅଗଷ୍ଟ

ବାଇବଲର ବହୁମୂଲ୍ୟ ଧନ ପାଆନ୍ତୁ | ଦ୍ୱିତୀୟ ବିବରଣ ୧୯-୨୧

“यहोवा इंसान के जीवन को अनमोल समझता है”

प्र17.11 पेज 14 पै 4

न्याय और दया करने में यहोवा की मिसाल पर चलिए

4 यहोवा ने छ: शरण नगर ठहराए थे जहाँ भागकर जाना आसान था। उसने इसराएलियों को यरदन के दोनों तरफ तीन-तीन नगर चुनने के लिए कहे थे। क्यों? वह इसलिए कि भागनेवाला जल्द-से-जल्द और आसानी से शरण नगर तक पहुँच सके। (गिन. 35:11-14) शरण नगर तक जानेवाली सड़कों को भी अच्छी हालत में रखा जाता था। (व्यव. 19:3) प्राचीन यहूदी किताबें बताती हैं कि सड़क के किनारे चिन्ह हुआ करते थे जिससे भागनेवाले को शरण नगर ढूँढ़ने में कोई दिक्कत न हो। इसराएल में शरण नगर इसलिए थे ताकि अनजाने में खून करनेवाला किसी पराए देश में हिफाज़त न ढूँढ़े, जहाँ वह झूठे देवताओं को पूजने के लिए लुभाया जा सकता था।

प्र17.11 पेज 15 पै 9

न्याय और दया करने में यहोवा की मिसाल पर चलिए

9 शरण नगर का इंतज़ाम करने की एक खास वजह यह थी कि इसराएली खून के दोषी न बनें। (व्यव. 19:10) यहोवा के लिए जीवन अनमोल है और वह कत्ल जैसे घिनौने काम से नफरत करता है। (नीति. 6:16, 17) यहोवा सच्चा न्यायी और पवित्र परमेश्‍वर है, इसलिए वह अनजाने में हुए कत्ल को भी नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता। यह सच है कि अनजाने में खून करनेवाले पर दया की जा सकती थी मगर उसे पहले मुखियाओं को सारी बात बतानी होती थीं। अगर मुखिया इस नतीजे पर पहुँचते थे कि वह कत्ल अनजाने में हुआ है, तो खून करनेवाले को तब तक शरण नगर में रहना होता था जब तक महायाजक की मौत नहीं हो जाती। इसका मतलब था कि उसे बाकी की ज़िंदगी शायद शरण नगर में ही बितानी पड़े। इस इंतज़ाम से इसराएली समझ पाए कि यहोवा जीवन को कितना अनमोल समझता है। जीवन देनेवाले का आदर करने के लिए उन्हें ऐसे हर काम से दूर रहना था जिससे एक इंसान की जान को खतरा हो।

इंसाइट-1 पेज 344

खून

अगर कोई किसी से नफरत करे और चाहे कि वह मर जाए या उसे बदनाम करे या उसके बारे में झूठी गवाही देकर उसकी जान खतरे में डाल दे, तो यह उसका खून करने के बराबर है।—लैव 19:16; व्य 19:18-21; 1यूह 3:15.

ବହୁମୂଲ୍ୟ ରତ୍ନ

ଇନସାଇଟ୍‌-୧ ପୃ ୫୧୮ ¶୧

ଅଦାଲତ

“ନଗରଦ୍ୱାର” ବା ଫାଟକର ଅର୍ଥ ସହର ଭିତରେ ଫାଟକ ପାଖରେ ଥିବା ଖୋଲା ଜାଗା । ସେହି ଜାଗାରେ ମକଦ୍ଦମା ପାଇଁ ସାକ୍ଷୀ ମିଳିବା ସହଜ ହେଉଥିଲା । ଯେପରି ସମ୍ପତ୍ତି ବିକିବା ମାମଲା ପାଇଁ, କାରଣ ଦିନବେଳେ ସେଇଠି ଲୋକମାନଙ୍କର ଯିବା ଆସିବା ଲାଗି ରହୁଥିଲା । ଫାଟକ ପାଖରେ ନ୍ୟାୟ କରିବାର ଆଉ ଗୋଟେ ଲାଭ ଥିଲା ଯେ ବିଚାରକର୍ତ୍ତାମାନେ ବୁଝିବିଚାରି ନିଷ୍ପତ୍ତି ନେଉଥିଲେ ଏବଂ ଅନ୍ୟାୟ କରିପାରୁ ନ ଥିଲେ କାରଣ ସେଠାରେ ବହୁତ ଲୋକମାନେ ରହୁଥିଲେ ।

୨-୮ ଅଗଷ୍ଟ

ବାଇବଲର ବହୁମୂଲ୍ୟ ଧନ ପାଆନ୍ତୁ | ଦ୍ୱିତୀୟ ବିବରଣ ୨୨-୨୩

“मूसा के कानून से पता चलता है कि यहोवा जानवरों की परवाह करता है”

इंसाइट-1 पेज 375-376

बोझ

मान लीजिए एक इसराएली देखता कि एक गधा उस बोझ के नीचे दबा हुआ है जिसे वह ढो रहा है। मगर वह गधा एक ऐसे आदमी का है जो उस आदमी से नफरत करता है। ऐसे में उसे क्या करना था? उसे यूँ ही चले नहीं जाना था बल्कि उस आदमी की मदद करनी थी ताकि वह गधे को बोझ से छुड़ा सके।—निर्ग 23:5.

इंसाइट-1 पेज 621 पै 1

व्यवस्थाविवरण

इसराएलियों के लिए ऐसी चिड़िया को उठा लेना मना था जो घोंसले में अंडों या बच्चों पर बैठी होती। वह अपने बच्चों की रक्षा कर रही होती है, इसलिए उसकी लाचारी का फायदा उठाना गलत था। वे चाहे तो बच्चों को ले सकते थे और चिड़िया को उड़ा सकते थे। फिर चिड़िया और भी अंडे देकर बच्चों को सेंक सकती थी।—व्य 22:6, 7.

प्र03 10/15 पेज 32 पै 1-2

“असमान जूए में न जुतो”

जैसा आप यहाँ देख सकते हैं कि ऊँट और साँड मिलकर जोत रहे हैं और दोनों को ही मुश्‍किल हो रही है। जुआ दरअसल समान आकार और ताकत रखनेवाले दो जानवरों को एक-साथ जोतने के लिए होता है, मगर इस जूए में दो अलग किस्म के जानवर साथ बंधे हैं इसलिए दोनों ही तकलीफ में हैं। बोझ ढोनेवाले ऐसे जानवरों को कोई तकलीफ न हो, इसलिए परमेश्‍वर ने इस्राएलियों से कहा था: “बैल और गदहा दोनों संग जोतकर हल न चलाना।” (व्यवस्थाविवरण 22:10) यही सिद्धांत साँड और ऊँट के लिए भी लागू होता है।

आम तौर पर एक किसान, दो किस्म के जानवरों को एक जूए में जोतकर उन्हें तकलीफ नहीं देना चाहता। लेकिन अगर उसके पास दो साँड नहीं हैं तो वह शायद दो किस्म के जानवरों को जो उसके पास हैं, एक-साथ जोत दे। लगता है, इस चित्र में दिखाए गए 19वीं सदी के किसान की भी यही मजबूरी थी। जानवरों के आकार और वज़न में फर्क होने की वजह से कमज़ोर जानवर को ताकतवर जानवर के साथ चलने में काफी मुश्‍किल होती है और दूसरी तरफ ताकतवर जानवर को ज़्यादा बोझ उठाना पड़ता है।

ବହୁମୂଲ୍ୟ ରତ୍ନ

ଇନସାଇଟ୍‌-୧ ପୃ ୬୦୦

ଋଣ, ଋଣ ନେଉଥିବା ବ୍ୟକ୍ତି

ଯେତେବେଳେ ଜଣେ ଇସ୍ରାଏଲୀୟ ବ୍ୟକ୍ତିର ଆର୍ଥିକ ଅବସ୍ଥା ବହୁତ ଖରାପ ରହୁଥିଲା, ସେତେବେଳେ କେବଳ ସେ ଋଣ ନେଉଥିଲା । ଋଣ ନେବାକୁ ଖରାପ ମନେ କରାଯାଉଥିଲା କାରଣ ଋଣ ନେଉଥିବା ବ୍ୟକ୍ତିକୁ ଋଣ ଦେଉଥିବା ବ୍ୟକ୍ତିର ଦାସ ବୋଲି ମନେ କରାଯାଉଥିଲା । (ହିତୋ ୨୨:୭) ଇସ୍ରାଏଲୀୟମାନଙ୍କୁ ଆଜ୍ଞା ଦିଆଯାଇଥିଲା ଯେ ଯଦି କେହି ଅଭାବ ଅସୁବିଧାରେ ଅଛି, ତେବେ ତାକୁ ହୃଦୟର ସହ ସାହାଯ୍ୟ କରିବାର ଥିଲା ଏବଂ ନିଜ ଲାଭ ବିଷୟରେ ଭାବିବାର ନ ଥିଲା । ତାʼ ପରିସ୍ଥିତିର ଲାଭ ଉଠାଇ ତାʼଠାରୁ ସୁଧ ନେବାର ନ ଥିଲା । (ଯାତ୍ରା ୨୨:୨୫; ଦ୍ୱିବି ୧୫:୭, ୮; ଗୀତ ୩୭:୨୬; ୧୧୨:୫) କିନ୍ତୁ ସେମାନେ ଅନ୍ୟ ଦେଶଗୁଡ଼ିକରୁ ଆସିଥିବା ବିଦେଶୀମାନଙ୍କଠାରୁ ସୁଧ ନେଇପାରୁଥିଲେ । (ଦ୍ୱିବି ୨୩:୨୦) ଯିହୁଦୀ ବିଦ୍ୱାନମାନଙ୍କ ଅନୁସାରେ ଇସ୍ରାଏଲୀୟମାନେ ଅଭାବ ଅସୁବିଧାରେ ଥିବା ବିଦେଶୀମାନଙ୍କଠାରୁ ସୁଧ ନେଇପାରୁ ନ ଥିଲେ କିନ୍ତୁ ବ୍ୟବସାୟ କରୁଥିବା ବିଦେଶୀମାନଙ୍କଠାରୁ ସୁଧ ନେଇପାରୁଥିଲେ । ଇସ୍ରାଏଲ ଦେଶରେ ଅଧିକାଂଶ ବିଦେଶୀମାନେ କିଛି ସମୟ ପାଇଁ ରହୁଥିଲେ, କାରଣ ସେମାନେ ବ୍ୟବସାୟ କରିବା ପାଇଁ ଆସୁଥିଲେ । ସେମାନଙ୍କଠାରୁ ସୁଧ ନେବା ଭୁଲ ନ ଥିଲା, କାରଣ ସେହି ବ୍ୟବସାୟୀମାନେ ନିଜେ ମଧ୍ୟ ଅନ୍ୟମାନଙ୍କୁ ଋଣ ଦେଇ ସେମାନଙ୍କଠାରୁ ସୁଧ ନେଉଥିଲେ ।

୯ -୧୫ ଅଗଷ୍ଟ

ବାଇବଲର ବହୁମୂଲ୍ୟ ଧନ ପାଆନ୍ତୁ | ଦ୍ୱିତୀୟ ବିବରଣ ୨୪ -୨୬

“मूसा के कानून से पता चलता है कि यहोवा स्त्रियों का खयाल रखता है”

इंसाइट-2 पेज 1196 पै 4

औरत

जिस आदमी की नयी-नयी शादी हुई होती है, उसे एक साल तक सेना से छूट मिलती थी। इससे उस नए जोड़े को अपना परिवार बढ़ाने का मौका मिलता। फिर जब वह आदमी सेना में जाता, तो बच्चे के होने से पत्नी के लिए उसकी जुदाई बरदाश्‍त करना आसान होता। और अगर पति युद्ध में मारा जाए, तो बच्चा उस औरत के जीने का सहारा होता।—व्य 20:7; 24:5.

इंसाइट-1 पेज 963 पै 2

बालें बीनने का इंतज़ाम

दाविद ने कहा था, “न तो मैंने कभी किसी नेक इंसान को त्यागा हुआ, न ही उसकी औलाद को रोटी के लिए भीख माँगते हुए देखा।” (भज 37:25) कानून में बताया गया था कि गरीब लोग खेतों में बची हुई बालें बीनकर ले जा सकते हैं। इसलिए उन्हें और उनके बच्चों को कभी-भी भीख माँगने की नौबत नहीं आती। वे कड़ी मेहनत करके रोटी कमाते थे और कभी भूखे नहीं रहते थे।

प्र11 3/1 पेज 23, अँग्रेज़ी

क्या आप जानते हैं?

पुराने ज़माने में इसराएल में अगर एक आदमी की मौत हो जाती और उसका कोई बेटा नहीं होता, तो उसके भाई को उसकी विधवा से शादी करनी होती थी। ऐसा करके वह अपने मरे हुए भाई के लिए संतान पैदा करता। तब उसका वंश चलता रहता। (उत्पत्ति 38:8) इस इंतज़ाम को देवर-भाभी विवाह कहा जाता था। बाद में मूसा के कानून में भी ऐसा करने के लिए कहा गया। (व्यवस्थाविवरण 25:5, 6) रूत की किताब के मुताबिक बोअज़ ने जो किया, उससे पता चलता है कि अगर एक आदमी का कोई भाई ज़िंदा नहीं बचता, तो उसके रिश्‍तेदारों में से किसी आदमी को विधवा से शादी करनी थी।—रूत 1:3, 4; 2:19, 20; 4:1-6.

मरकुस 12:20-22 में सदूकियों ने देवर-भाभी विवाह का ज़िक्र किया। इससे पता चलता है कि यीशु के दिनों में भी लोग यह दस्तूर मानते थे। पहली सदी के इतिहासकार फ्लेवियस जोसीफस के मुताबिक इस दस्तूर की वजह से एक परिवार का नाम कभी नहीं मिटता, विरासत उसके पास ही रहती और विधवा बेसहारा नहीं होती थी। उस ज़माने में एक पत्नी को पति की जायदाद पाने का हक नहीं था। इसलिए देवर-भाभी विवाह से विधवा को जो बच्चा होता, उसे अपने पिता की विरासत मिल जाती थी।

ବହୁମୂଲ୍ୟ ରତ୍ନ

ଇନସାଇଟ୍‌-୧ ପୃ ୬୪୦ ¶୫

ଛାଡ଼ପତ୍ର

ତ୍ୟାଗପତ୍ର—ମୋଶାଙ୍କ ନିୟମରେ ଛାଡ଼ପତ୍ର ବିଷୟରେ ଯାହା କୁହାଯାଇଥିଲା, ଆଗକୁ ଯାଇ ଲୋକମାନେ ତାର ଭୁଲ ବ୍ୟବହରା କଲେ । ନିୟମରେ ଏପରି କୁହାଯାଇ ନ ଥିଲା ଯେ ଜଣେ ବ୍ୟକ୍ତି କୌଣସି ଛୋଟ ମୋଟ କାରଣ ଯୋଗୁଁ ନିଜ ପତ୍ନୀଙ୍କୁ ଛାଡ଼ପତ୍ର ଦେଇପାରିବେ । ଛାଡ଼ପତ୍ର ଦେବା ପାଇଁ ପତିଙ୍କୁ କିଛି ପଦକ୍ଷେପ ନେବାକୁ ପଡ଼ୁଥିଲା । ତାଙ୍କୁ ଏକ ତ୍ୟାଗପତ୍ର ତିଆରି କରିବାକୁ ପଡ଼ୁଥିଲା । ତାʼ ପରେ ନିଜ ପତ୍ନୀଙ୍କ ହାତରେ ଦେବାର ଥିଲା ଏବଂ ତାଙ୍କୁ ଘରୁ ବାହାର କରିଦେବାର ଥିଲା । (ଦ୍ୱିବି ୨୪:୧) ବାଇବଲରେ ଏବିଷୟରେ ବେଶୀ କିଛି କୁହାଯାଇ ନାହିଁ । କିନ୍ତୁ ଏହି ଆଇନ ଅନୁସାରେ କାର୍ଯ୍ୟାନୁଷ୍ଠାନ କରିବା ପାଇଁ ପତିଙ୍କୁ ହୁଏତ ତାʼ ଆଗରୁ ଅଧିକାର ଦିଆଯାଇଥିବା ବ୍ୟକ୍ତିମାନଙ୍କ ସହିତ କଥା ହେବାର ଥିଲା । ସେମାନେ ସେହି ପତିପତ୍ନୀଙ୍କୁ ଏକାଠି କରିବା ପାଇଁ ନିଶ୍ଚୟ ଚେଷ୍ଟା କରୁଥିଲେ । ତ୍ୟାଗପତ୍ର ତିଆରି କରିବା ଏବଂ ପୂରା କାର୍ଯ୍ୟାନୁଷ୍ଠାନ କରିବା ପାଇଁ ସମୟ ଲାଗନ୍ତା । ସେହି ସମୟରେ ପତି ପୁଣିଥରେ ଭାବିପାରନ୍ତେ ଯେ ଛାଡ଼ପତ୍ର ଦେବା ଠିକ୍‌ ହେବ ନା ନୁହଁ ଏବଂ ଛାଡ଼ପତ୍ର ଦେବା ପାଇଁ ସଠିକ୍‌ କାରଣ ମଧ୍ୟ ହେବା ଜରୁରୀ ଥିଲା । ଯଦି ସେ ସବୁ ନିୟମ ଅନୁସାରେ କରନ୍ତେ, ତେବେ ସେ ତରବରରେ କିଛି ମଧ୍ୟ ନିଷ୍ପତ୍ତି ନିଅନ୍ତେ ନାହିଁ । ତାʼ ସହ ସେ ନିଜ ପତ୍ନୀଙ୍କ ଅଧିକାରକୁ ଛଡ଼ାଇ ନିଅନ୍ତେ ନାହିଁ ଏବଂ ତାକୁ ଅସହାୟ ଛାଡ଼ନ୍ତେ ନାହିଁ ।

୧୬-୨୨ ଅଗଷ୍ଟ

ବାଇବଲର ବହୁମୂଲ୍ୟ ଧନ ପାଆନ୍ତୁ | ଦ୍ୱିତୀୟ ବିବରଣ ୨୭-୨୮

“ये सारी आशीषें तुम्हें आ घेरेंगी”

प्र10 12/15 पेज 19 पै 18

पवित्र शक्‍ति के निर्देशन में चलनेवाले राजा से आशीष पाइए!

18 सुनने का मतलब है कि परमेश्‍वर के वचन में जो कहा गया है और जो आध्यात्मिक भोजन मुहैया कराया जाता है, उसे अपने दिल में उतारना। (मत्ती 24:45) इसका यह भी मतलब है कि हम परमेश्‍वर और उसके बेटे की आज्ञा मानें। यीशु ने कहा: “जो मुझे ‘हे प्रभु, हे प्रभु’ कहते हैं, उनमें से हर कोई स्वर्ग के राज में दाखिल नहीं होगा, मगर जो मेरे स्वर्गीय पिता की मरज़ी पूरी कर रहा है, वही दाखिल होगा।” (मत्ती 7:21) तो परमेश्‍वर की सुनने में उसके ठहराए इंतज़ाम, जैसे मसीही मंडली और “आदमियों के रूप में [दिए] तोहफे” या नियुक्‍त प्राचीनों के खुशी-खुशी अधीन रहना शामिल है।—इफि. 4:8.

प्र01 9/15 पेज 10 पै 2

क्या यहोवा की आशीषें आपको जा लेंगी?

2 व्यवस्थाविवरण 28:2 में जिस इब्रानी क्रिया का अनुवाद “हमेशा सुनता रहे” किया गया है, उसका मतलब ऐसा काम है जो लगातार किया जाता है। इससे ज़ाहिर होता है कि यहोवा के लोगों के लिए कभी-कभार उसकी बात सुन लेना काफी नहीं है; बल्कि उन्हें हमेशा, हर बात में उसकी सुननी चाहिए। सिर्फ तभी परमेश्‍वर की आशीषें उनको जा लेंगी। जिस इब्रानी क्रिया का अनुवाद “जा लेंगी” किया गया है, उसका कई बार यह मतलब बताया जाता है: “दौड़कर पकड़ लेना” या “पहुँच जाना।”

प्र10 9/15 पेज 8 पै 4

यहोवा की आशीष पाने के लिए मेहनत कीजिए

4 इसराएलियों को किस रवैये के साथ परमेश्‍वर की आज्ञा माननी थी? परमेश्‍वर के नियम में बताया गया था कि अगर उसके लोग “आनन्द और प्रसन्‍नता के साथ” उसकी सेवा नहीं करेंगे तो इससे परमेश्‍वर नाराज़ होगा। (व्यवस्थाविवरण 28:45-47 पढ़िए।) यहोवा नहीं चाहता कि उसकी आज्ञाएँ बेमन से मानी जाएँ, ऐसा तो जानवर या दुष्ट स्वर्गदूत भी कर सकते हैं; वह इससे ज़्यादा का हकदार है। (मर. 1:27; याकू. 3:3) सच्चे दिल से परमेश्‍वर की आज्ञा मानना दिखाएगा कि हम उससे प्यार करते हैं, जिसमें हमारी खुशी झलकेगी। हमें उसकी आज्ञाएँ बोझ नहीं लगेंगी, साथ ही यहोवा के इस वादे पर हम विश्‍वास ज़ाहिर करेंगे कि “वह उन लोगों को इनाम देता है जो पूरी लगन से उसकी खोज करते हैं।”—इब्रा. 11:6; 1 यूह. 5:3.

ବହୁମୂଲ୍ୟ ରତ୍ନ

ଇନସାଇଟ୍‌-୧ ପୃ ୩୬୦

ସୀମା-ଚିହ୍ନ

ଅଧିକାଂଶ ଲୋକମାନେ ଖାଦ୍ୟ ପାଇଁ ନିଜ ଜମିର ଉତ୍ପାଦ ଉପରେ ନିର୍ଭର ଥିଲେ । ତେଣୁ ଯଦି କେହି କାହାରି ଜମିର ସୀମାର ଚିହ୍ନକୁ ଘୁଞ୍ଚାଇ ଜମିକୁ ହଡ଼ପ କରୁଥିଲା, ତେବେ ସେ ସତେ ଯେପରି ତାʼ ଖାଦ୍ୟକୁ ଛଡ଼ାଇ ନେଉଥିଲା । ଏହା ଚୋରି କରିବା ସହ ସମାନ ଥିଲା ।—ଆୟୁ ୨୪:୨.

୨୩-୨୯ ଅଗଷ୍ଟ

ବାଇବଲର ବହୁମୂଲ୍ୟ ଧନ ପାଆନ୍ତୁ | ଦ୍ୱିତୀୟ ବିବରଣ ୨୯-୩୦

“यहोवा की सेवा करना बहुत मुश्‍किल नहीं है”

प्र10 7/1 पेज 27 पै 2

यहोवा हमें खुद चुनाव करने का मौका देता है

परमेश्‍वर हमसे क्या चाहता है, क्या यह जानना और उसके मुताबिक काम करना बहुत मुश्‍किल है? मूसा ने कहा: “जो आज्ञा मैं आज तुझे देता हूं, वह न तो तेरे लिए बहुत कठिन है न तुझसे परे है।” (आयत 11, NHT) यहोवा हमसे ऐसा कोई काम करने के लिए नहीं कहता, जिसे पूरा करना हमारे लिए नामुमकिन हो। वह हमसे हद-से-ज़्यादा की माँग नहीं करता। इसके अलावा, हम यह आसानी से जान सकते हैं कि वह हमसे क्या चाहता है। यह पता करने के लिए हमें “आकाश में” जाने की ज़रूरत नहीं है, न ही हमें “समुद्र पार” जाने की ज़रूरत है। (आयत 12, 13) बाइबल साफ-साफ बताती है कि हमें कैसी ज़िंदगी जीनी चाहिए।—मीका 6:8.

प्र10 7/1 पेज 27 पै 1

यहोवा हमें खुद चुनाव करने का मौका देता है

“मुझे अकसर यह डर सताता था कि मैं कुछ-न-कुछ गलत कर बैठूँगी और यहोवा की वफादार नहीं रह पाऊँगी।” यह बात एक मसीही स्त्री ने कही। उसके साथ बचपन में कुछ बुरे अनुभव हुए थे, जिनकी वजह से उसे लगता था कि वह ज़रूर कोई गलती कर बैठेगी। क्या वाकई ऐसा होता है? क्या हम सचमुच हालात के सामने बेबस हैं? नहीं। यहोवा परमेश्‍वर ने हमें आज़ाद मरज़ी का तोहफा दिया है, यानी हम खुद यह चुनाव कर सकते हैं कि हम कैसी ज़िंदगी जीएँगे। यहोवा चाहता है कि हम सही चुनाव करें और उसका वचन बाइबल ऐसा करने में हमारी मदद करती है। कैसे? यह जानने के लिए आइए हम बाइबल की एक किताब व्यवस्थाविवरण के अध्याय 30 में दर्ज़ मूसा के शब्दों पर गौर करें।

प्र10 7/1 पेज 27 पै 4

यहोवा हमें खुद चुनाव करने का मौका देता है

हम कौन-सा रास्ता चुनते हैं, क्या इससे यहोवा को कोई फर्क पड़ता है? बिलकुल पड़ता है! परमेश्‍वर की प्रेरणा से मूसा ने कहा: “जीवन को चुन ले।” (आयत 19, NHT) लेकिन हम जीवन को कैसे चुन सकते हैं? मूसा ने समझाया: “अपने परमेश्‍वर यहोवा से प्रेम करना, उसकी सुनना तथा उस से लिपटे रहना।” (आयत 20) अगर हमारे दिल में यहोवा के लिए प्यार होगा, तो हम हर हाल में उसकी बात सुनेंगे, उसकी आज्ञा मानेंगे और उसके वफादार बने रहेंगे। इस तरह हम जीवन को चुन रहे होंगे। हम आज जीवन की सबसे बेहतरीन राह पर चल रहे होंगे और इससे हमें परमेश्‍वर की नयी दुनिया में हमेशा की ज़िंदगी पाने की आशा मिलेगी।—2 पतरस 3:11-13; 1 यूहन्‍ना 5:3.

ବହୁମୂଲ୍ୟ ରତ୍ନ

ଇନସାଇଟ୍‌-୧ ପୃ ୬୬୫ ¶୩

କାନ

କିଛି ଇସ୍ରାଏଲୀୟମାନଙ୍କ କାନ ଏପରି ବନ୍ଦ ହୋଇଥିଲା ଯେ ସେମାନେ ଶୁଣିପାରୁ ନ ଥିଲେ ଏବଂ ଯିହୋବା ମଧ୍ୟ ସେମାନଙ୍କ କାନ ଖୋଲିଲେ ନାହିଁ । ଯଦି ଜଣେ ବ୍ୟକ୍ତି ଯିହୋବାଙ୍କୁ ଖୁସି କରିବାକୁ ଚାହେଁ, ତେବେ ଯିହୋବା ତାʼ କାନ ଖୋଲି ଦିଅନ୍ତି ଅର୍ଥାତ୍‌ ତାହାଙ୍କ ଇଚ୍ଛା ଜାଣିବା ପାଇଁ ତାକୁ ସାହାଯ୍ୟ କରନ୍ତି । କିନ୍ତୁ ଯଦି ଜଣେ ବ୍ୟକ୍ତି ତାହାଙ୍କ କଥା ନ ମାନେ, ତେବେ ସେ ତାହାଙ୍କ କଥା ଶୁଣିପାରିବ ନାହିଁ ଏବଂ ଯିହୋବା ତାକୁ ଏପରି ହିଁ ରହିବାକୁ ଦେବେ । ସେହି ବ୍ୟକ୍ତି ତାହାଙ୍କ ଇଚ୍ଛା ଜାଣିପାରିବ ନାହିଁ ।—ଦ୍ୱିବି ୨୯:୪; ରୋମୀ ୧୧:୮.

୩୦ ଅଗଷ୍ଟ–୫ ସେପ୍ଟେମ୍ବର

ବାଇବଲର ବହୁମୂଲ୍ୟ ଧନ ପାଆନ୍ତୁ | ଦ୍ୱିତୀୟ ବିବରଣ ୩୧-୩୨

“एक ईश्‍वर-प्रेरित गीत में बतायी मिसालों से सीखिए”

प्र20.06 पेज 10 पै 8-9

“मेरे मन को एक कर कि मैं तेरे नाम का डर मानूँ”

8 इसराएली वादा किए गए देश में कदम रखने ही वाले थे। उसी वक्‍त यहोवा ने मूसा को एक गीत सिखाया। (व्यव. 31:19) फिर मूसा को वह गीत इसराएलियों को सिखाना था। (व्यवस्थाविवरण 32:2, 3 पढ़िए।) इन आयतों पर मनन करने से हमें यहोवा की सोच पता चलती है। वह नहीं चाहता कि उसका नाम लोगों से छिपा रहे, मानो यह इतना पवित्र है कि इसे ज़बान पर नहीं लाया जा सकता। इसके बजाय वह चाहता है कि हर कोई उसका नाम जाने! इसराएलियों के लिए यहोवा और उसके महान नाम के बारे में सीखना वाकई सम्मान की बात थी। जैसे हलकी बौछार से पेड़-पौधे हरे-भरे हो जाते हैं, उसी तरह मूसा की बातों से इसराएलियों को ताज़गी मिली होगी। अगर हम चाहते हैं कि हमारी बातों से लोगों को ताज़गी मिले तो हम क्या कर सकते हैं?

9 घर-घर प्रचार करते वक्‍त या सरेआम गवाही देते वक्‍त हम बाइबल से लोगों को परमेश्‍वर का नाम बता सकते हैं। हम उन्हें कुछ किताबें-पत्रिकाएँ दे सकते हैं और वीडियो दिखा सकते हैं। हम उन्हें अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के बारे में भी बता सकते हैं। हम स्कूल में, काम की जगह पर या सफर करते वक्‍त मौका ढूँढ़कर लोगों को परमेश्‍वर और उसके नाम के बारे में बता सकते हैं। हम उन्हें यह भी बता सकते हैं कि परमेश्‍वर इंसानों और इस धरती के लिए क्या-क्या करेगा। इससे वे समझ पाएँगे कि परमेश्‍वर सच में उनसे प्यार करता है। जब हम लोगों को अपने पिता यहोवा के बारे में सच्चाई बताते हैं, तो हम उसका नाम पवित्र कर रहे होते हैं। हम ऐसी कई झूठी बातों का परदाफाश कर रहे होते हैं जो उन्हें सिखायी गयी थीं। हम लोगों को बाइबल से जो सिखाते हैं, उससे उन्हें बहुत ताज़गी मिलती है।—यशा. 65:13, 14.

प्र09 5/1 पेज 14 पै 4, अँग्रेज़ी

बाइबल में बतायी गयी मिसालें—क्या आप उनका मतलब समझते हैं?

बाइबल की कुछ आयतों में यहोवा की तुलना बेजान चीज़ों से की गयी है। उसे “इसराएल की चट्टान,” “बड़ी चट्टान” और “मज़बूत गढ़” कहा गया है। (2 शमूएल 23:3; भजन 18:2; व्यवस्थाविवरण 32:4) यहोवा और एक चट्टान में क्या बातें मिलती-जुलती हैं? एक बड़ी चट्टान मज़बूती से एक जगह टिकी होती है और उसे हिलाया नहीं जा सकता। यहोवा पर आप भरोसा रख सकते हैं कि वह एक बड़ी चट्टान की तरह आपको सुरक्षा दे सकता है।

प्र01 10/1 पेज 9 पै 7

बच्चों को सिखाते वक्‍त यहोवा जैसे बनिए

7 गौर कीजिए कि यहोवा ने इस्राएलियों से व्यवहार करते वक्‍त उन्हें कैसा प्रेम दिखाया। इस्राएल जाति हाल में बनी थी और यहोवा को इस जाति के लिए कैसा प्रेम है, यह समझाने के लिए मूसा ने एक बेजोड़ मिसाल दी। उसने कहा: “जैसे उकाब अपने घोंसले को हिला हिलाकर अपने बच्चों के ऊपर ऊपर मण्डलाता है, वैसे ही उस ने अपने पंख फैलाकर उसको अपने परों पर उठा लिया। यहोवा अकेला ही [याकूब की] अगुवाई करता रहा।” (व्यवस्थाविवरण 32:9,11,12) अपने बच्चों को उड़ना सिखाने के लिए, मादा उकाब ‘अपने घोंसले को हिलाती’ है, जो अकसर एक ऊँचे टीले पर बना होता है। अपने पंख फड़फड़ाकर वह अपने बच्चों को उड़ने के लिए उकसाती है। जब आखिरकार बच्चा, अपने घोंसले से छलाँग लगाता है तो उसकी माँ उसके ऊपर ‘मंडराती’ रहती है। जब उसे लगता है कि बच्चा ज़मीन से जा टकराएगा, तो वह झपट्टा मारकर उसके नीचे चली जाती है और उसे “अपने परों पर” उठा लेती है। यहोवा ने भी इसी तरह बड़े प्यार से इस्राएल जाति की देखभाल की थी जिसका जन्म अभी-अभी हुआ था। उसने उन्हें मूसा के ज़रिए कानून-व्यवस्था दी। (भजन 78:5-7) और फिर, परमेश्‍वर लगातार इस जाति पर नज़र लगाए रहा, और जब कभी उसके लोगों पर मुसीबत आती तो वह उन्हें बचाने के लिए फौरन कार्यवाही करता।

ବହୁମୂଲ୍ୟ ରତ୍ନ

ପ୍ର୦୪-ହି ୯/୧୫ ପୃ ୨୭ ¶୧୦

ଦ୍ୱିତୀୟ ବିବରଣ ବହିର ମୁଖ୍ୟାଂଶ

୩୧:୧୨—ମଣ୍ଡଳୀର ସଭାରେ ପିଲାମାନେ ବଡ଼ମାନଙ୍କ ସହ ବସିବା ଉଚିତ୍‌ । ତାʼ ସହ ସେମାନେ ଧ୍ୟାନର ସହ ଶୁଣିବା ଏବଂ ଶିଖିବା ପାଇଁ ଚେଷ୍ଟା କରିବା ଉଚିତ୍‌ ।

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