बुधवार, 15 अप्रैल
एक-दूसरे से प्यार करो।—यूह. 15:12.
यहोवा के लोग एक-दूसरे से प्यार करते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं। (2 कुरिं. 8:4) लेकिन कभी-कभी ऐसा करने के लिए उन्हें हिम्मत की भी ज़रूरत होती है। जैसे जब युद्ध छिड़ जाता है, तो प्राचीन भाई-बहनों की खातिर बहुत कुछ करते हैं। वे उनकी खाने-पीने की ज़रूरतों का खयाल रखते हैं और ध्यान रखते हैं कि उन्हें बाइबल और दूसरे प्रकाशन मिलते रहें। वे उनका हौसला भी बढ़ाते हैं। प्राचीन सभी भाई-बहनों से बहुत प्यार करते हैं, इसलिए उनकी मदद करने के लिए अपनी जान तक खतरे में डाल देते हैं। ऐसे हालात में बहुत ज़रूरी होता है कि हम अपने बीच एकता बनाए रखें। इसलिए शाखा दफ्तर से जो हिदायतें मिलती हैं, उन्हें मानिए। (इब्रा. 13:17) विपत्ति आने पर क्या किया जाना चाहिए, इस बारे में हरेक मंडली में कुछ इंतज़ाम किए जाते हैं और संगठन भी इस बारे में कुछ हिदायतें देता है। प्राचीनों को समय-समय पर उन इंतज़ामों और हिदायतों पर गौर करना चाहिए। (1 कुरिं. 14:33, 40) हिम्मत से काम लीजिए, पर सतर्क भी रहिए। (नीति. 22:3) कुछ भी करने से पहले सोचिए और बेवजह खतरा मोल मत लीजिए। यहोवा पर भरोसा रखिए। भाई-बहनों की रक्षा करने में वह आपकी मदद ज़रूर करेगा। प्र24.07 पेज 4 पै 8; पेज 5 पै 11
गुरुवार, 16 अप्रैल
मुसीबत में मैंने यहोवा को पुकारा, . . . मेरी मदद की पुकार उसके कानों तक पहुँची।—भज. 18:6.
राजा दाविद यहोवा को अच्छी तरह जानता था और उसे उस पर पूरा भरोसा था। इसलिए जब राजा शाऊल और दूसरे दुश्मन उसकी जान के पीछे पड़े थे, तो दाविद ने मदद के लिए यहोवा को पुकारा। यहोवा ने उसकी प्रार्थना सुनी और उसे बचाया। तब दाविद ने कहा, “यहोवा जीवित परमेश्वर है!” (भज. 18:46) दाविद सिर्फ यह नहीं कह रहा था कि परमेश्वर सचमुच में है। उसके शब्दों के बारे में एक किताब में यह लिखा है कि दाविद यहोवा पर अपना यकीन ज़ाहिर कर रहा था, वह कह रहा था, “जीवित परमेश्वर के नाते वह हमेशा अपने लोगों की मदद करेगा।” तो दाविद अपने अनुभव से जानता था कि यहोवा एक जीवित परमेश्वर है, वह जानता है कि उसके सेवकों के साथ क्या हो रहा है। और इस वजह से दाविद पूरे जोश से यहोवा की सेवा करता रहा और उसकी तारीफ करता रहा। (भज. 18:28, 29, 49) अगर हमें भी पूरा यकीन होगा कि यहोवा जीवित परमेश्वर है, तो हम जोश से उसकी सेवा करेंगे। हम हिम्मत से मुश्किलों का सामना कर पाएँगे और जी-जान से उसकी सेवा करते रहेंगे। यही नहीं, हम ठान लेंगे कि चाहे जो हो जाए हम यहोवा के करीब रहेंगे। प्र24.06 पेज 20-21 पै 3-4
शुक्रवार, 17 अप्रैल
कोई तुम्हें किसी तरह गुमराह न करे।—2 थिस्स. 2:3.
प्रेषित पौलुस ने थिस्सलुनीकियों की मंडली को जो लिखा, उससे हम क्या सीखते हैं? जब हम कोई ऐसी बात सुनते हैं जो बाइबल की शिक्षाओं से मेल नहीं खाती या हम कोई सनसनीखेज़ खबर सुनते हैं, तो हमें सोच-समझकर काम लेना चाहिए। ध्यान दीजिए कि सोवियत संघ में हमारे भाइयों के साथ क्या हुआ था। एक बार सरकारी अधिकारियों ने भाइयों को एक खत दिया जिसे देखने पर ऐसा लग रहा था कि वह विश्व मुख्यालय से आया है। उस खत में कुछ भाइयों से कहा गया था कि वे अलग से एक संगठन की शुरूआत करें। दिखने में वह खत बिलकुल असली लग रहा था, लेकिन वफादार भाई गुमराह नहीं हुए। वे समझ गए कि उसमें लिखी बातें बाइबल से मेल नहीं खातीं। आज भी हमारे दुश्मन हमें गुमराह करने की कोशिश करते हैं। वे इंटरनेट और सोशल मीडिया के ज़रिए झूठी बातें फैलाते हैं और हमारे बीच फूट डालने की कोशिश करते हैं। इसलिए कभी-भी ‘उतावली में आकर अपनी समझ-बूझ मत खोइए।’ इसके बजाय जब भी आप कुछ पढ़ते हैं या सुनते हैं, तो यह जानने की कोशिश कीजिए कि क्या वह बाइबल के मुताबिक सही है या नहीं, तब आप गुमराह नहीं होंगे।—2 थिस्स. 2:2; 1 यूह. 4:1. प्र24.07 पेज 11-12 पै 14-15